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In Conversation With Dr. Rakhi Sharma

Rakhi Sharma

राखी शर्मा के बारे में:

डॉ. राखी शर्मा का मूल निवास मध्य प्रदेश के बालाघाट में है। राखी शर्मा जी पेशे से एक होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी है एवं अभी जिला कोविड कमांड में कार्यरत हैं।
अपने बारे में बताते हुए कहती हैं कि ये कोई प्रसिद्ध लेखिका या रोमियो की जूलियट की तरह प्रेम में गुम प्रेमिका नहीं हैं ..बस लेखन की दुनिया की अद्भूत बात ये है कि यहां दर्द, लिखा भी ज्यादा जाता है और समझा भी।“
अब तक आठ कविता संकलनों में अपने लेख प्रकाशन के उपरांत, “परेशां जुल्फों सा इश्क़.. बस इतना ही” इनके काव्य संग्रह का पहला प्रकाशन है।

LiFT: हमें अपनी पुस्तक और इसे लिखने की यात्रा के बारे में बताएं।

डॉ. राखी शर्मा: मोहब्बत जानते हो?” जब कोई मुझसे पूछता है, मैं सोच में पड़ जाती हूँ, अपने अतीत और वर्तमान के पहलुओं पर, गौर करते हुए कहती हूँ कि – “हाँ, जानती हूँ मोहब्बत, उसके हसीं पल, इक दूजे में खोए रहना, वो वक़्त का थम जाना, बिना कहे सब समझ लेना, नोंक झोंक, ईर्ष्या, उसके दर्द, उनकी पीड़ा, दिलों का जुड़ना, बेवफ़ा होना और उस बेवफ़ाई के डर से गलतियाँ करना, अपनी मोहब्बत को तार-तार कर देना एक झूठ से, और बिखेर कर रख देना उस महीन शहद में डूबे लम्हें को जिस लम्हे का हमने, सदियों इन्तेज़ार किया है, सब जानती हूँ मैं। कहते हैं, लोग प्यार में झूठ नहीं कहते, जनाब! झूठ कहते हैं वो, जो कहते हैं हम प्यार में झूठ नहीं कहते। ये किताब और उसमें लिखी हर कविता के, अपने अलग पहलू हैं मोहब्बत के, जिसे लिखना मेरी मज़बूरी नहीं थी मेरा सुकूं था।
इस किताब में हर वो पहलू आपको देखने व पढ़ने मिलेगा जो इश्क़ /प्रेम /मोहब्बत में होते हैं।
जैसे किसी इश्क़ में चोट खाए हुए व्यक्ती से दोबारा पूछा जाए तो उसका ज़वाब पढ़िए इन पंक्तियों में– “दीमक लगी है, उस कोने पर देखो जहां इश्क लिखा था.”
या फिर किसी टूटे सपनें का व्याख्यान हो –
“आज कुछ अल्फाज़ मेरे गलीचे में रखे मिले, कुछ बिखरे मोती की तरह तो कुछ टूटे सपनों की मानिंद”.

LiFT: आपने अपनी पुस्तक के लिए यह शीर्षक क्यों चुना?

डॉ. राखी शर्मा: मैंने यह शीर्षक इसलिए चुना क्योंकि यह प्यार और इसके चरणों के बारे में है। कभी आप अलग हो जाते हैं, कभी आप प्यार में और टूटने की प्रक्रिया के बीच बढ़ते हैं। आपको पता होना चाहिए कि अगर आप अंदर दर्द महसूस कर रहे हैं तो आप एक मजबूत योद्धा के रूप में बाहर बढ़ेंगे और प्यार आपको अपने जीवन के एक योद्धा की तरह महसूस कराता है।

LiFT: आपको कब पता चला कि आप कवि बनना चाहते हैं और इसके पीछे आपकी प्रेरणा क्या है?

डॉ. राखी शर्मा: बचपन से ही जो बातें कह नहीं पाती वो लिख दिया करती हूँ, इसलिए लिखना तो बचपन से ही शुरू कर दिया था। पर जब अपनी कविताओं को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाकर सोशल साइट्स पर पब्लिश करना शुरू किया और लोगों की अच्छी प्रतिक्रियाएं मिलने लगी तो आगे बढ़ने का सोचा और पढ़ना शुरू किया अच्छे लेखकों को फिर शुरू किया लेखन।

LiFT: साहित्य की दुनिया में दस साल बाद आप खुद को कहां देखते हैं?

डॉ. राखी शर्मा: इतना भविष्य के विषय में सोचने वाले रचनाकारों में से नहिं हूँ मैं.. मैं बस खुदको अपनी कविताओं के साथ गर्व से ऊंचा सर रख कर समाज और उनके रूढ़िवादी दायरों को तोड़ते हुए देखती हूँ खुदको।

LiFT: क्या आपको लगता है कि किसी किताब को प्रमोट करने और उसके पाठकों को बढ़ाने के लिए किताब की मार्केटिंग या क्वॉलिटी जरूरी है?

डॉ. राखी शर्मा: मार्केटिंग बहुत जरूरी है किसी भी नयी प्रतिभा अथवा प्रतिभाशाली व्यक्तियों के लिए, ताकि उन्हें सही प्रतिक्रियाएं मिले और आगे बढ़ने का हौसला भी।

LiFT: आप अपने लेखन से लोगों को क्या संदेश देना चाहते हैं?

डॉ. राखी शर्मा: प्रेम ही सर्वज्ञ, सतत सत्य है।

LiFT: आप लेखन के अलावा क्या करते हैं?

डॉ. राखी शर्मा: मैं गाने गाती हू, चाहे खुशी हो या दुःख गाना और लिखना मेरे पसन्दीदा काम है।

LiFT: क्या आप अपनी अगली किताब पर काम कर रहे हैं? यदि हां, तो कृपया हमें इसके बारे में कुछ बताएं।

डॉ. राखी शर्मा: नहीं अब तक नहीं सोचा है इस बारे में, यदि लिखना चाहूँगी आगे तो कुछ अन्य विषय हैं जिनपर लिखना शुरू करुँगी जैसे किताबें, देशभक्ति, रूढ़िवादी बुनियाद इत्यादि।

LiFT: नवोदित कवियों को आपके क्या सुझाव हैं ताकि वे अपने लेखन कौशल में सुधार कर सकें?

डॉ. राखी शर्मा: स्वाध्याय, आत्म चिंतन और एकाकीपन आपके जीवन के वो अभिन्न पहलु हैं जिनसे आप स्वयं को पढ़ कर महसूस कर सकने में सक्षम होते हैं और जब आप किसी बात या फिर किसी पहलू को समझने में सक्षम होते हैं तो आप उस बारे में ज्यादा बेहतर लिख सकते हैं। इसके अलावा आप अच्छे अच्छे उम्दा लेखकों की रचना पढ़ कर उनसे उनका अनुभव प्राप्त कर सकते हैं मेरे कुछ पसन्दीदा लेखकों में सम्मिलित हैं – जौन एलिया साहब, वसीम बरेलवी एवं गीत चतुर्वेदी जी।

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परेशां जुल्फों सा इश्क़.. बस इतना ही

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13 thoughts on “In Conversation With Dr. Rakhi Sharma

  1. डॉ. राखी शर्मा वास्तव में एक प्रेरणा हैं और ऐसा वव्यक्तिव जिसे सीखने की ललक के साथ देखना चाहिए।
    उनकी कविताओं में दुनिया की सबसे शुद्ध भावना के प्रति तीव्र करुणा दिखाई देती है साथ ही उनका शब्द चयन उम्दा है।
    मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं कि उसके पास क्षमता और इच्छा है.. साहित्यिक क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने की..और मैं कामना करता हूं कि वह ऐसा ही करें।

  2. डॉ राखी शर्मा बालाघट से है वास्तव में गर्व की बात है और इनसे प्रेरणा मिलती है कि वास्तव में इंसान को इतना सरल होना चाहिए।इनकी कविता प्रभावित करने वाली है।और भविष्य में कामना हैं कि बहुत आगे जाएँगी।

  3. Good and nice book and Mam is also good working I know personally during the covid she is working dedicatedly and nice coordination work as a govt employee …

  4. बचपन से ही सबको खुशी बांटना जिस नन्ही परी का प्यारा सा काम था.. वो आज इतनी अद्भुत रचनायें गढ़ रही है। गर्वित मन उज्जवल भविष्य की कामना कर रहा है.. कला आपके जीवन में सांस बनकर प्रवाहित हो.. और आप अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सतत प्रयास करें.. रुकें नहीं.. झुके नहीं..

  5. Bahut Hi Pyare Shaks Or Inke Bhav Y jis Parkar Sabdo K Madhyam Se Dikhate Hai Seedha Dil Or Dimag Pr Ek Gahra Asar krte hai
    Har shbd dil ko chu jata hai

  6. अकेलापन जब एकांत में बदलने लगता है..
    तब एक लेखक की कलम चलने लगती है…

    राखी शर्मा आप जिंदगी यू ही आगे बढ़ती रहें.. आपके सुनहरे भविष्य के लिए भगवान से यही कामना करता हूं 👍

  7. व्यक्ति के विचारों की लेखनी होती है। निरन्तर लिखे हम अवश्य पढ़ेंगे

  8. सपने देखना सभी के बस मे है ,साकार कुछ ही कर पाते हैं ,इस बात पर आने पर अपनो की भावना लेखन मे प्रकट करने मे सफल होना गर्व की अनुभूति देता है।
    आगामी रचनाओं की प्रतीक्षा व सुखद भविष्य की कामना के साथ सस्नेह शुभकामनाएं।

  9. कवयीत्री राखी शर्मा,
    आपके विचारों में अनन्य प्रेम भाव और विषय कि गुढता नजर आती है.
    यथावत ही अपने संकलन पर्काशित करते रहिए.

  10. ” चलना हि है राह पे तो डगमगा के चल,
    रौशन कर जहांन को तू जगमगा के चल।
    चल इस कदर के गिरने का हो तुझको ना कोई खौफ,
    चल इस कदर कि मंजिल को पास आने का तेरे शौक ”
    – इंजीनियर गौरव शर्मा

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